बांग्लादेश: ढाका में ख़ालिदा ज़िया के बेटे तारिक़ रहमान से मिले जयशंकर, भारत क्या दे रहा है संकेत?
बांग्लादेश की राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हलचल मच गई जब यह खबर सामने आई कि भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ढाका में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की प्रमुख खालिदा ज़िया के बेटे और पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक़ रहमान से मुलाकात की। यह मुलाकात एक ऐसे समय में हुई है जब बांग्लादेश में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है और भारत अपने 'पड़ोस पहले' नीति के तहत क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने का प्रयास कर रहा है। इस उच्च-स्तरीय बैठक ने कूटनीतिक हलकों में कई सवालों को जन्म दिया है कि भारत आखिर इस मुलाकात के जरिए बांग्लादेश को क्या संकेत देना चाहता है।
बांग्लादेश: ढाका में ख़ालिदा ज़िया के बेटे तारिक़ रहमान से मिले जयशंकर, भारत क्या दे रहा है संकेत?
घटना का सारांश — कौन, क्या, कब, कहाँ
ढाका, 20 नवंबर, 2024: भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में बांग्लादेश की अपनी यात्रा के दौरान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक़ रहमान से मुलाकात की। यह मुलाकात ढाका में हुई और इसकी जानकारी हालांकि आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं की गई, लेकिन राजनीतिक और मीडिया हलकों में इसकी खबरें तेजी से फैलीं। इस मुलाकात ने भारत-बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों और बांग्लादेश की घरेलू राजनीति में संभावित बदलावों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।
तारिक़ रहमान, जो पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया के बेटे हैं, वर्तमान में लंदन में निर्वासन में रह रहे हैं और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या अन्य माध्यमों से पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि खालिदा ज़िया और उनकी पार्टी, बीएनपी, ऐतिहासिक रूप से भारत के साथ अवामी लीग की तुलना में अधिक दूरी बनाए रखती रही है। ऐसे में जयशंकर का उनसे मिलना एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। इस बैठक में भारत की क्षेत्रीय रणनीतियों और बांग्लादेश के आगामी आम चुनावों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
बांग्लादेश: ढाका में ख़ालिदा ज़िया के बेटे तारिक़ रहमान से मिले जयशंकर, भारत क्या दे रहा है संकेत? — प्रमुख बयान और संदर्भ
भारत ने पारंपरिक रूप से बांग्लादेश में शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार का समर्थन किया है, जिसे भारत-मित्र के रूप में देखा जाता है। हालांकि, जयशंकर की तारिक़ रहमान से यह मुलाकात भारत की बांग्लादेश नीति में एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत दे सकती है। इस बैठक के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं, जिनमें बांग्लादेश की घरेलू राजनीति में स्थिरता सुनिश्चित करना और भारत के रणनीतिक हितों की रक्षा करना शामिल है। भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बांग्लादेश में कोई भी सत्ता परिवर्तन हो, तो उसके राष्ट्रीय हित प्रभावित न हों।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुलाकात के जरिए भारत बांग्लादेश में अपनी पकड़ मजबूत करने और चीनी प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है। चीन लगातार बांग्लादेश में अपनी आर्थिक और रणनीतिक उपस्थिति बढ़ा रहा है, जिससे भारत के लिए अपनी पारंपरिक भूमिका को बनाए रखना एक चुनौती बन गया है। तारिक़ रहमान से मिलकर भारत यह संदेश देना चाहता है कि वह बांग्लादेश के सभी प्रमुख राजनीतिक स्टेकहोल्डर्स के साथ संबंध बनाए रखने को तैयार है, चाहे वे सत्ता में हों या विपक्ष में। यह भारत की 'पड़ोस पहले' नीति का एक व्यावहारिक विस्तार हो सकता है।
यह बैठक बांग्लादेश के आगामी चुनावों से पहले हो रही है। बीएनपी लगातार निष्पक्ष चुनाव की मांग कर रही है और मौजूदा सरकार पर धांधली का आरोप लगा रही है। ऐसे में भारत की ओर से विपक्ष के प्रमुख नेता से मुलाकात को एक तटस्थता भरे संकेत के रूप में देखा जा सकता है। यह दर्शाता है कि भारत बांग्लादेश के लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करता है और सभी पक्षों को एक समान रूप से देखता है। हालांकि, कुछ लोग इसे भारत द्वारा अपनी रणनीतिक टोकरी में अधिक अंडे रखने की रणनीति के रूप में भी देखते हैं, ताकि भविष्य में किसी भी सरकार के साथ काम करने के लिए रास्ते खुले रहें।
इस मुलाकात के संदर्भ में, यह भी याद रखना महत्वपूर्ण है कि तारिक़ रहमान भ्रष्टाचार के कई मामलों में वांछित हैं और उन्हें बांग्लादेश की अदालतों द्वारा दोषी ठहराया गया है। उनके निर्वासन में रहने के बावजूद, वह बीएनपी के एक शक्तिशाली नेता बने हुए हैं। जयशंकर का उनसे मिलना, उनके कानूनी मुद्दों से परे, एक राजनीतिक संदेश है कि भारत उनके राजनीतिक कद को स्वीकार करता है। यह मुलाकात भारत के लिए बांग्लादेश के आंतरिक राजनीतिक मामलों में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होने का एक तरीका भी हो सकता है, ताकि देश की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।
भारत के लिए बांग्लादेश एक महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है, न केवल भौगोलिक निकटता के कारण, बल्कि सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी और ऊर्जा सहयोग के दृष्टिकोण से भी। सीमा पार आतंकवाद, अवैध प्रवासन और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में, भारत बांग्लादेश में एक स्थिर और मैत्रीपूर्ण सरकार देखना चाहेगा, चाहे वह किसी भी दल की हो। इस बैठक को इस व्यापक रणनीतिक परिप्रेक्ष्य से देखा जाना चाहिए, जहाँ भारत अपनी विदेश नीति में लचीलापन और बहुआयामी दृष्टिकोण अपना रहा है।
पार्टियों की प्रतिक्रिया
इस मुलाकात के बाद बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली और सतर्क रही हैं। सत्ताधारी अवामी लीग ने इस मामले पर आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन पार्टी के भीतर इसे लेकर चिंता और असंतोष देखा जा रहा है। अवामी लीग के कुछ नेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि भारत का बीएनपी जैसे 'भारत विरोधी' समझे जाने वाले दल के नेता से मिलना उनकी 'ऐतिहासिक दोस्ती' के लिए अच्छा संकेत नहीं है। हालांकि, वे सार्वजनिक तौर पर भारत के साथ अपने 'अटूट संबंध' को दोहराते रहे हैं।
दूसरी ओर, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने इस मुलाकात का स्वागत किया है और इसे अपनी पार्टी के लिए एक जीत के रूप में देखा है। बीएनपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह भारत द्वारा विपक्ष की लोकतांत्रिक भूमिका को स्वीकार करने का प्रमाण है। उन्होंने यह भी आशा व्यक्त की कि यह मुलाकात बांग्लादेश में निष्पक्ष और विश्वसनीय चुनावों के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने में मदद करेगी। बीएनपी इसे अपनी अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता में वृद्धि के रूप में प्रचारित कर रही है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी सरकार विरोधी प्रदर्शनों में सक्रिय है।
बांग्लादेश की अन्य छोटी पार्टियों और नागरिक समाज समूहों ने इस मुलाकात पर मिश्रित राय व्यक्त की है। कुछ का मानना है कि भारत को बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में इस तरह से शामिल नहीं होना चाहिए, जबकि अन्य इसे एक सकारात्मक कदम मानते हैं जो बांग्लादेश में अधिक समावेशी राजनीतिक संवाद को बढ़ावा दे सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात ने बांग्लादेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है, खासकर भारत की भूमिका और उसके हितों को लेकर।
राजनीतिक विश्लेषण / प्रभाव और मायने
जयशंकर की तारिक़ रहमान से मुलाकात के गहरे राजनीतिक मायने हैं। यह भारत की 'पड़ोस पहले' नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है, जहाँ भारत अब केवल सत्ताधारी दलों के साथ ही नहीं, बल्कि विपक्ष के प्रमुख स्टेकहोल्डर्स के साथ भी संबंध बनाने पर जोर दे रहा है। यह दृष्टिकोण भारत को क्षेत्रीय भू-राजनीतिक अस्थिरता और चीनी प्रभाव के खिलाफ एक मजबूत स्थिति में रखता है। भारत यह संदेश देना चाहता है कि उसकी प्राथमिकता बांग्लादेश की स्थिरता और उसकी आंतरिक संप्रभुता का सम्मान करना है, चाहे कोई भी दल सत्ता में हो।
यह मुलाकात बांग्लादेश के आगामी आम चुनावों को लेकर भी महत्वपूर्ण है। यदि बीएनपी चुनाव जीतती है या एक मजबूत विपक्ष के रूप में उभरती है, तो भारत को उसके साथ काम करने के लिए एक पूर्व-स्थापित चैनल मिल जाएगा। यह भारत के लिए एक 'बैकअप प्लान' के रूप में कार्य करता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि भविष्य में किसी भी राजनीतिक परिदृश्य में उसके राष्ट्रीय हित सुरक्षित रहें। भारत के लिए बांग्लादेश के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि यह पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण सेतु है।
इसके अतिरिक्त, यह मुलाकात बांग्लादेश में चीन के बढ़ते प्रभाव को भी संबोधित करती है। चीन ने बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश किया है, जिससे बीजिंग का रणनीतिक दबदबा बढ़ रहा है। भारत, अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के साथ मिलकर, यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बांग्लादेश किसी एक शक्ति के पाले में न झुके। तारिक़ रहमान से मिलकर भारत ने बीएनपी को यह संदेश दिया है कि वह चीन के करीब जाने के बजाय भारत के साथ भी मजबूत संबंध बनाए रख सकता है। यह एक जटिल भू-राजनीतिक संतुलन का हिस्सा है।
हालांकि, इस कदम से अवामी लीग और भारत के बीच संबंधों में कुछ तनाव भी आ सकता है। अवामी लीग इसे भारत द्वारा 'पीठ में छुरा घोंपने' के रूप में देख सकती है, खासकर जब भारत ने लगातार उनका समर्थन किया है। भारत को इस संतुलन को सावधानीपूर्वक निभाना होगा ताकि वह अपने पारंपरिक सहयोगी को नाराज किए बिना अपने व्यापक रणनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त कर सके। यह मुलाकात भारत की विदेश नीति में एक अधिक परिपक्व और यथार्थवादी दृष्टिकोण को दर्शाती है, जहाँ वह केवल एक ही घोड़े पर दांव लगाने के बजाय विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहा है।
क्या देखें
- बांग्लादेश के आगामी चुनाव: यह मुलाकात चुनावों पर क्या प्रभाव डालती है और क्या बीएनपी को इससे कोई राजनीतिक बढ़त मिलती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
- अवामी लीग की प्रतिक्रिया: सत्ताधारी अवामी लीग भविष्य में भारत के प्रति अपनी नीति में क्या बदलाव लाती है, इस पर नजर रखी जाएगी।
- भारत-बीएनपी संबंधों का भविष्य: क्या यह मुलाकात भारत और बीएनपी के बीच औपचारिक संबंधों की शुरुआत है, और क्या भविष्य में ऐसी और बैठकें होंगी।
- क्षेत्रीय भू-राजनीति: चीन और अन्य देशों की प्रतिक्रिया क्या होती है, और क्या यह बांग्लादेश में अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नया आकार देती है।
- भारत की 'पड़ोस पहले' नीति का विकास: क्या यह घटना भारत की क्षेत्रीय नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देती है, जहाँ वह अधिक लचीला और बहुआयामी दृष्टिकोण अपना रहा है।
निष्कर्ष — आगे की संभावनाएँ
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की तारिक़ रहमान से मुलाकात एक मामूली घटना नहीं है, बल्कि यह भारत की बदलती क्षेत्रीय कूटनीति का एक स्पष्ट संकेत है। यह दिखाता है कि भारत अब केवल एक पक्ष के साथ संबंध बनाए रखने के बजाय बांग्लादेश के राजनीतिक स्पेक्ट्रम में अधिक व्यापक रूप से जुड़ना चाहता है। इस कदम से बांग्लादेश में भारत के रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखने और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है, खासकर चीन के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर।
हालांकि, इस कदम के अपने जोखिम भी हैं, विशेष रूप से भारत के पारंपरिक सहयोगी अवामी लीग के साथ संबंधों में संभावित तनाव। भारत को इस नाजुक संतुलन को बनाए रखने के लिए सावधानीपूर्वक आगे बढ़ना होगा। कुल मिलाकर, यह मुलाकात भारत की विदेश नीति में एक अधिक परिपक्व और व्यावहारिक दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करती है, जो यह स्वीकार करती है कि क्षेत्रीय स्थिरता और दीर्घकालिक हित केवल बहुआयामी जुड़ाव से ही सुरक्षित रह सकते हैं। भविष्य में बांग्लादेश की राजनीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर इस मुलाकात के दीर्घकालिक प्रभाव देखने लायक होंगे।
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